
बिहार की सियासत में फिर से ‘क्राइम vs क्लेम’ का नया एपिसोड शुरू हो गया है। मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या के बाद विपक्ष ने नीतीश सरकार पर “जंगलराज रिटर्न्स” का आरोप लगाया। लेकिन, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कैमरे के सामने ठोकर मारते हुए कहा — “अगर हम अपराधियों को बचाते, तो अनंत सिंह की गिरफ्तारी शनिवार रात नहीं होती।”
उन्होंने साफ़ कहा, “हमारी सरकार का स्टैंड क्लियर है — ना किसी को बचाना है, ना किसी को फँसाना है।”
‘महाजंगलराज’ बनाम ‘एक्शन ऑन टाइम’
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर बिहार में “महाजंगलराज” बताया और कहा कि “राज्य में हर रोज़ गोलियां चल रही हैं।”
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी तंज कसा — “ये है असली जंगलराज, जहां चुनाव के बीच नेताओं पर फायरिंग हो रही है।”
लेकिन चिराग पासवान का जवाब सधा हुआ था — “एक भी अपराध हमारी सरकार के लिए चिंता का विषय है। दोषी कोई भी हो, छोड़ा नहीं जाएगा।”

अनंत सिंह की गिरफ्तारी से सियासत में नया मोड़
मोकामा में 30 अक्टूबर की दोपहर दुलारचंद यादव की हत्या के बाद आरोप सीधे ‘बाहुबली’ नेता अनंत सिंह पर लगे — जो इस बार जेडीयू उम्मीदवार हैं। शनिवार रात पुलिस ने अनंत सिंह को दबोच लिया, और यहीं से चिराग पासवान को मिला जवाबी तीर चलाने का मौका।
बिहार में ‘कानून’ का GPS ऑन है या ऑफ़?
विपक्ष कह रहा है — “बिहार में गोली चल रही है।”
सत्ता पक्ष कह रहा है — “गिरफ्तारी चल रही है।”
और जनता सोच रही है — “कानून-व्यवस्था सीरीज है क्या? हर हफ्ते नया एपिसोड!”
बिहार में सियासत गरम, बयानबाज़ी उससे भी ज़्यादा
दुलारचंद यादव की हत्या ने बिहार की चुनावी सियासत को गरमा दिया है। जहां विपक्ष “जंगलराज” का एलान कर रहा है, वहीं चिराग पासवान और नीतीश कुमार की जोड़ी “एक्शन गवर्नेंस” का झंडा थामे मैदान में है। अब देखना ये है कि जनता किसके नैरेटिव को “अपवोट” करती है —
‘महाजंगलराज’ या ‘नो बख्शा पॉलिसी’?
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